नात लिरिक्स

Bayan Ho Kis Zaban Se Martaba Siddiq-e-Akbar Ka

बयाँ हो किस ज़बाँ से मर्तबा सिद्दीक़-ए-अकबर का

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बयाँ हो किस ज़बाँ से मर्तबा सिद्दीक़-ए-अकबर काहै यार-ए-ग़ार महबूब-ए-ख़ुदा सिद्दीक़-ए-अकबर का

इलाही ! रहम फ़रमा ख़ादिम-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर हूँतेरी रहमत के सदक़े, वास्ता सिद्दीक़-ए-अकबर का

रुसुल और अंबिया के बा'द जो अफ़ज़ल हो 'आलम सेये 'आलम में है किस का मर्तबा ? सिद्दीक़-ए-अकबर का

गदा सिद्दीक़-ए-अकबर का ख़ुदा से फ़ज़्ल पाता हैख़ुदा के फ़ज़्ल से मैं हूँ गदा सिद्दीक़-ए-अकबर का

हुए फ़ारूक़-ओ-'उस्मान-ओ-'अली जब दाख़िल-ए-बै'अतबना फ़ख़्र-ए-सलासिल सिलसिला सिद्दीक़-ए-अकबर का

नबी का और ख़ुदा का मद्ह-गो सिद्दीक़-ए-अकबर हैनबी सिद्दीक़-ए-अकबर का, ख़ुदा सिद्दीक़-ए-अकबर का

'अली हैं उस के दुश्मन और वो दुश्मन 'अली का हैजो दुश्मन 'अक़्ल का, दुश्मन हुआ सिद्दीक़-ए-अकबर का

लुटाया राह-ए-हक़ में घर कई बार इस मोहब्बत सेकि लुट लुट कर, हसन ! घर बन गया सिद्दीक़-ए-अकबर का

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