नात लिरिक्स

Ajab Rang Par Hai Bahar-e-Madina

अजब रंग पर है बहार-ए-मदीना

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अजब रंग पर है बहार-ए-मदीनाकि सब जन्नतें हैं निसार-ए-मदीना

मुबारक रहे, 'अंदलीबो ! तुम्हें गुलहमें गुल से बेहतर हैं ख़ार-ए-मदीना

बना शह-नशीं ख़ुसरव-ए-दो-जहाँ काबयाँ क्या हो 'इज़्ज़-ओ-वक़ार-ए-मदीना

मेरी ख़ाक, या रब ! न बर्बाद जाएपस-ए-मर्ग कर दे ग़ुबार-ए-मदीना

कभी तो म'आसी के ख़िरमन में, या रब !लगे आतिश-ए-लाला-ज़ार-ए-मदीना

रग-ए-गुल की जब नाज़ुकी देखता हूँमुझे याद आते हैं ख़ार-ए-मदीना

मलाइक लगाते हैं आँखों में अपनीशब-ओ-रोज़ ख़ाक-ए-मज़ार-ए-मदीना

जिधर देखिए बाग़-ए-जन्नत खुला हैनज़र में हैं नक़्श-ओ-निगार-ए-मदीना

रहें उन के जल्वे, बसें उन के जल्वेमेरा दिल बने यादगार-ए-मदीना

हरम है उसे साहत-ए-हर-दो-'आलमजो दिल हो चुका है शिकार-ए-मदीना

दो-'आलम में बटता है सदक़ा यहाँ काहमीं इक नहीं रेज़ा-ख़्वार-ए-मदीना

बना आसमाँ मंज़िल-ए-इब्न-ए-मरियमगए ला-मकाँ ताजदार-ए-मदीना

मुराद-ए-दिल-ए-बुलबुल-ए-बे-नवा देख़ुदाया ! दिखा दे बहार-ए-मदीना

शरफ़ जिन से हासिल हुआ अंबिया कोवही हैं, हसन ! इफ़्तिख़ार-ए-मदीना

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