नात लिरिक्स

Aye Shafi-e-Umam Tum Pe Behad Salam

ऐ शफ़ी-ए-उमम तुम पे बेहद सलाम

नात ख़्वान: क़ारी रिज़वान ख़ानशायर: मौलाना शाकिर नूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ शफ़ी'-ए-उमम ! तुम पे बेहद सलामऐ जमीलुश्शियम ! तुम पे बेहद सलाम

जब मदीने के माह-ए-तमाम आ गएहो गया का'बा ख़म, तुम पे बेहद सलाम

ला-मकाँ के मकीं आप जब हैं हुए'अर्श ज़ेर-ए-क़दम, तुम पे बेहद सलाम

किस की जानिब चलूँ, किस का मुँह मैं तकूँतुम हो दाफ़े'-ए-ग़म, तुम पे बेहद सलाम

अल-मदद, या नबी ! कहते ही हो गएदूर रंज-ओ-अलम, तुम पे बेहद सलाम

लब पे जारी हो कलमा, ज़बाँ पर दुरूदजब भी निकले ये दम, तुम पे बेहद सलाम

फिर मदीने में मुझ को बुला लीजिएऐ मेरे मोहतरम ! तुम पे बेहद सलाम

फ़िक्र-ए-उम्मत में लब पर दु'आएँ रहीआँख रहती थी नम, तुम पे बेहद सलाम

ग़ौस-ओ-ख़्वाजा रज़ा के तुफ़ैल, ऐ करीम !रख लो मेरा भरम, तुम पे बेहद सलाम

लाज अपने ग़ुलामों की रखते हो तुमरखना मेरा भरम, तुम पे बेहद सलाम

चाहता है रज़ा शाकिर-ए-ग़म-ज़दाकह दो राज़ी हैं हम, तुम पे बेहद सलाम

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