नात लिरिक्स

Muqaddar Jaag Uttha Hai Haram Ki Khak Sar Par Hai

मुक़द्दर जाग उट्ठा है हरम की ख़ाक सर पर है

नात ख़्वान: क़ारी रिज़वान ख़ानशायर: क़ारी रिज़वान ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुक़द्दर जाग उट्ठा है, हरम की ख़ाक सर पर हैज़बाँ पर हम्द-ए-बारी है, नज़र में का'बे का दर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

अदब से चूमता हूँ संग-ए-अस्वद मैं कि महशर मेंबताएगा मुनाफ़िक़ कौन है और कौन हक़ पर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

हतीम-ए-पाक है मीज़ाब है और बंदा-ए-'आसी'इनायत है शह-ए-दीं की 'अता-ए-रब्ब-ए-अकबर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

हुआ महसूस जब बोसा लिया रुक्न-ए-यमानी काकि ख़ुश्बू-ए-मुहम्मद से अभी तक ये मु'अत्तर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

मेरी हर इक दु'आ, मौला ! इजाबत का शरफ़ पाएइजाबत की है मंज़िल और दु'आ-ए-क़ल्ब-ए-मुज़्तर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

ख़लीलुल्लाह के क़दमों को देखा तो नज़र आयागुनहगारों की ख़ातिर ये मक़ाम-ए-दाफ़े'-ए-शर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

लिपट कर मुल्तज़म से मैं ने अक्सर ये दु'आ माँगीकभी ज़ाइल न फ़रमाना कि जो ने'मत मुक़द्दर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

सफ़ा मरवा की करता हूँ स'ई तो दिल ये कहता हैजनाब-ए-हाजिरा का वाक़'ई आ'ला मुक़द्दर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

यहाँ मुख़्तार-ए-दो 'आलम के भी दस्त-ए-तलब उट्ठेये दर बख़्शिश का दरिया है 'अताओं का समंदर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

यहीं पर मौत आ जाए तो मेरी ख़ुश-नसीबी हैशब-ए-मीलाद है, रिज़वान है, सरकार का दर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

मुक़द्दर जाग उट्ठा है, हरम की ख़ाक सर पर हैज़बाँ पर हम्द-ए-बारी है, नज़र में का'बे का दर है

लब्बैक लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

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