नात लिरिक्स

Khayal Aata Hai Dil Mein Ye Gar Hua Hota

ख़याल आता है दिल में ये गर हुआ होता

नात ख़्वान: क़ारी रिज़वान ख़ानशायर: सय्यिद अमीन-उल-क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़याल आता है दिल में ये गर हुआ होताउन्हीं के दौर में मैं ने जनम लिया होता

मैं चुपके चुपके उन्हें देखता रहा होतानसीब वालों का फिर मैं भी पेशवा होता

वो चलते आगे मेरे शान-ए-दिलरुबाई सेमैं पीछे उन की सवारी के दौड़ता होता

मेरे भी सर पे तसल्ली का हाथ रखते वोयतीम गर मैं उसी दौर-ए-पाक का होता

मुझे भी मिलता शरफ़ तलवे चूम लेने कानबी-ए-पाक की पा-पोश बन गया होता

वो ले के जाते मुझे रोज़, काश ! सहरा मेंहलीमा दाई की बकरी ही बन गया होता

वो आ के मेरे जनाज़े पे जब खड़े होतेकफ़न हटा के मैं उन को ही तक रहा होता

अमीन-ए-ख़स्ता का उठता जनाज़ा तयबा मेंमुराद अपनी बे-चारा ये पा गया होता

मुझे भी साकिन-ए-तयबा बना दिया होतानबी का नक़्श-ए-कफ़-ए-पा बना दिया होता

मैं उन के शहर में बे-रोक-टोक जा सकताहवा का मुझ को जो झोंका बना दिया होता

मह-ओ-नुजूम से बेहतर चमक मेरी होतीजो उन के कूचे का ज़र्रा बना दिया होता

बक़ी'-ए-पाक 'अता कर के अपने रिज़वाँ कोमुक़ीम-ए-शहर-ए-मदीना बना दिया होता

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