नात लिरिक्स

Aseeron Ke Mushkil Kusha Ghaus-e-Azam

असीरों के मुश्किल-कुशा ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: फ़रहान अली क़ादरीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

असीरों के मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !फ़क़ीरों के हाजत-रवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

गिरा है बलाओं में बंदा तुम्हारामदद के लिए आओ, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरे हाथ में हाथ मैं ने दिया हैतेरे हाथ है लाज, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मुरीदों को ख़तरा नहीं बहर-ए-ग़म सेकि बेड़े के हैं ना-ख़ुदा ग़ौस-ए-आ'ज़म

तुम्हीं दुख सुनो अपने आफ़त-ज़दों कातुम्हीं दर्द की दो दवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

भँवर में फँसा है सफ़ीना हमाराबचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

ज़माने के दुख-दर्द की, रंज-ओ-ग़म कीतेरे हाथ में है दवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

निकाला है पहले तो डूबे हुओं कोऔर अब डूबतों को बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

जिसे ख़ल्क़ कहती है प्यारा ख़ुदा काउसी का है तू लाडला, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

फँसा है तबाही में बेड़ा हमारासहारा लगा दो ज़रा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मेरी मुश्किलों को भी आसान कीजेकि हैं आप मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

वहाँ सर झुकाते हैं सब ऊँचे ऊँचेजहाँ है तेरा नक़्श-ए-पा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

क़सम है कि मुश्किल को मुश्किल न पायाकहा हम ने जिस वक़्त या ग़ौस-ए-आ'ज़म

बचा ले ग़ुलामों को मजबूरियों सेकि तू 'अब्द-ए-क़ादिर है, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

सरों पर जिसे लेते हैं ताज वालेतुम्हारा क़दम है वो, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

अधर में, पिया ! मोरी डोलत है नैयाकहूँ का से अपनी बिथा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

बिपत में कटी मोरी सगरी 'उमरियाकरो मो पे अपनी दया, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

कहे किस से जा कर हसन अपने दिल कीसुने कौन तेरे सिवा, ग़ौस-ए-आज़म !

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