नात लिरिक्स

Darpesh Ho Taiba Ka Safar Kaisa Lagega

दरपेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

नात ख़्वान: फ़रहान अली क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगागुज़रे जो वहाँ शाम-ओ-सहर कैसा लगेगा

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

बड़ा अच्छा लगेगा, बड़ा प्यारा लगेगा

ऐ काश ! मदीने में मुझे मौत यूँ आएक़दमों में हो सरकार के सर कैसा लगेगा

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

बड़ा अच्छा लगेगा, बड़ा प्यारा लगेगा

ऐ प्यारे ख़ुदा ! देखूँ मैं सरकार का जल्वामिल जाए दु'आ को जो असर कैसा लगेगा

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

बड़ा अच्छा लगेगा, बड़ा प्यारा लगेगा

जब दूर से है इतना हसीं गुंबद-ए-ख़ज़राइस पार ये 'आलम है, उधर कैसा लगेगा

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

बड़ा अच्छा लगेगा, बड़ा प्यारा लगेगा

आ जाएँ अगर घर में मेरे रहमत-ए-'आलममैं कैसा लगूँगा, मेरा घर कैसा लगेगा

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

बड़ा अच्छा लगेगा, बड़ा प्यारा लगेगा

तयबा की स'आदत तो यूँ पाते हैं हज़ारोंमुर्शिद का साथ हो जो सफ़र कैसा लगेगा

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

बड़ा अच्छा लगेगा, बड़ा प्यारा लगेगा

पाई है मुनव्वर ने क़ज़ा दर पे नबी केआ जाए वतन में ये ख़बर कैसा लगेगा

दर-पेश हो तयबा का सफ़र कैसा लगेगा

बड़ा अच्छा लगेगा, बड़ा प्यारा लगेगा

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