नात लिरिक्स

Main Kya Hun Har Koi Shaida Hai Ala Hazrat Ka | Jidhar Bhi Dekhiye Jalwa Hai Ala Hazrat Ka

मैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आला हज़रत का | जिधर भी देखिए जल्वा है आला हज़रत का

नात ख़्वान: फ़रहान अली क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत काजिधर भी देखिए जल्वा है आ'ला हज़रत का

मैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत का

अदब नबी का सिखाया है आ'ला हज़रत नेकि जाम-ए-'इश्क़ पिलाया है आ'ला हज़रत नेतभी तो हर तरफ़ ना'रा है आ'ला हज़रत कामैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत का

गुज़ारा हक़ के लिए आप ने है हर लम्हातमाम 'उम्र 'अक़ीदे पे है दिया पहराबहार-ए-सुन्नियत सदक़ा है आ'ला हज़रत कामैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत का

मिली वो शान नबी से उन्हें ज़रा सोचोवफ़ात पाए सदी इक गुज़र गई उन कोदिलों पे आज भी क़ब्ज़ा है आ'ला हज़रत कामैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत का

चराग़ हो गए गुल उन से जलने वालों केहैं नाम ज़िंदा वफ़ा उन से करने वालों केसनद बुलंदी की रस्ता है आ'ला हज़रत कामैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत का

ब-रोज़-ए-हश्र जो पूछेगा मुझ से मेरा ख़ुदाबता क्या लाया है, आल-ए-रसूल ! तू तोहफ़ाज़बाँ पे नाम तब आएगा आ'ला हज़रत कामैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत का

हो फ़िक्र-ए-हश्र क्यूँ ? किस बात का हो डर, 'आसिम !है उन का दस्त-ए-करम मेरे काँधे पर, 'आसिम !करम है ग़ौस का, साया है आ'ला हज़रत कामैं क्या हूँ हर कोई शैदा है आ'ला हज़रत का

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।