नात लिरिक्स

Dil Hai Ghamgeen Mera Ashkbaar Hain Aankhen

दिल है ग़मगीन मेरा अश्क-बार हैं आँखें

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या ख़ुदा ! सुन सदा, या ख़ुदा ! सुन सदा

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखेंचैन मिलता ही नहीं, बे-क़रार हैं आँखें

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखें

मुँह को आता है कलेजा, वो है मंज़र देखाक़ुद्स की गलियों में इक ख़ूँ का समंदर देखा

चैन मिलता ही नहीं, बे-क़रार हैं आँखें

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखें

मस्जिद-ए-अक़्सा को है फिर से सुलगता देखादूध पीते हुए बच्चों को तड़पता देखा

चैन मिलता ही नहीं, बे-क़रार हैं आँखें

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखें

माओं बहनों की भी हैं चीख़ें सुनी कानों नेज़ुल्म ढाया यूँ फ़लस्तीन में शैतानों ने

चैन मिलता ही नहीं, बे-क़रार हैं आँखें

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखें

छोटे बच्चों के जनाज़े भी हैं उठते देखेबूढ़े माँ-बाप भी हैं मैं ने सिसकते देखे

चैन मिलता ही नहीं, बे-क़रार हैं आँखें

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखें

मुझ गुनहगार की तू, मौला ! दु'आ कर ले क़ुबूलया ख़ुदा ! सड़ के मरें दुनिया से गुस्ताख़-ए-रसूल

चैन मिलता ही नहीं, बे-क़रार हैं आँखें

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखें

क़ल्ब-ए-'आसिम की, मेरे मौला ! तू अब सुन ले सदाफिर फ़लस्तीन को आज़ादी 'अता कर दे, ख़ुदा !

चैन मिलता ही नहीं, बे-क़रार हैं आँखें

दिल है ग़मगीन मेरा, अश्क-बार हैं आँखें

या ख़ुदा ! सुन सदा, या ख़ुदा ! सुन सदा

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।