नात लिरिक्स

Ali Wale Jahan Baithe Wahin Jannat Bana Baithe

अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: रज़ा सिरसीवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़क़ीरों का है क्या चाहे जहाँ बस्ती बसा बैठे'अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे

फ़राज़-ए-दार हो, मक़्तल हो, ज़िंदाँ हो कि सहरा होजहाँ ज़िक्र-ए-'अली छेड़ा वहाँ दीवाने आ बैठे

कोई मौसम, कोई भी वक़्त, कोई भी 'इलाक़ा होजली 'इश्क़-ए-'अली की शम'अ और परवाने आ बैठे

'अली वालों का मरना भी कोई मरने में मरना हैचले अपने मकाँ से और 'अली के दर पे जा बैठे

इधर रुख़्सत किया सब ने, उधर आए 'अली लेनेयहाँ सब रो रहे थे हम वहाँ महफ़िल सजा बैठे

अभी मैं क़ब्र में लेटा ही था इक नूर सा फैलामेरी बालीं पे ख़ुद आ कर 'अली-ए-मुर्तज़ा बैठे

ये कौन आया कि इस्तिक़बाल को सब अंबिया उट्ठेन बैठेगा कोई तब तक, न जब तक मुस्तफ़ा बैठे

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