नात लिरिक्स

Chamakne Lagi Hai Dulhan Ban Ke Dargaah, Ki Ashraf Mere Aaj Dulha Bane Hain

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाह, कि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: सय्यिद जामी अशरफ़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

हवाएँ मु'अत्तर, फ़ज़ाएँ मु'अत्तरहै गलियों में छिड़का हुआ मुश्क-ओ-'अंबरहै आया हुआ आज जन्नत से जोड़ाकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

यहाँ हर मरज़ की दवा भी मिलेगीयहाँ हर मरज़ से शिफ़ा भी मिलेगीयहाँ शाह-ए-सिमनाँ का है प्यारा रोज़ाकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

यहीं पर नबी हैं, यहीं पर 'अली हैंयहीं पर हसन हैं, यहीं पंज-तन हैंलुटाने हुसैन आए कर्बल से सदक़ाकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

वो 'औन-ओ-मुहम्मद, वो 'अब्बास-ओ-अकबरवो बीमार 'आबिद, वो नन्हें से असग़रयहीं पर है कर्ब-ओ-बला आज साराकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

यहीं ग़ौस-ए-आ'ज़म भी जल्वा-नुमा हैंयक़ीनन यहीं आज ख़्वाजा पिया हैंहै पंडवा से आए हुए शाह-ए-पंडवाकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

यहीं ग़ौस-ए-आ'ज़म, यहीं शाह-ए-मीराँयहीं पर हैं ख़्वाजा, यहीं पर हैं साबिरहै पंडवा से आए हुए शाह-ए-पंडवाकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चले आएँ सारे ग़रीब-ओ-तवंगरलुटाते हैं भर भर के मख़्दूम, जामी !है मौका हसीं भर लें सब अपना कासाकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

चमकने लगी है दुल्हन बन के दरगाहकि अशरफ़ मेरे आज दूल्हा बने हैं

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