नात लिरिक्स

Chalo Karein Mil Kar Charcha Huzoor Ka

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'आशिक़ों का राज है, महफ़िलों का ताज हैजल्से हैं, जुलूस हैं, झूमता समाज है'इश्क़ का मिज़ाज है, 'इश्क़ का मिजाज़ है

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर काजगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का

आए शाह-ए-अंबिया ! मरहबा या मुस्तफ़ा !क्या समाँ है नूर का ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

उतरा है चाँद घर में मौला के नूर काहोने लगा है घर-घर चर्चा हुज़ूर का

जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का

फैली है नूरी किरने देखो जगह जगहआया है ये महीना कैफ़-ओ-सुरूर का

जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का

मीलाद-ए-मुस्तफ़ा की महफ़िल सजाएँगे हमये फ़ैसला है, यारो ! अहल-ए-श'ऊर का

जिब्रील की है सुन्नत पढ़ लो हदीस मेंलहराएगा जहाँ में परचम हुज़ूर का

जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का

आए शाह-ए-अंबिया ! मरहबा या मुस्तफ़ा !क्या समाँ है नूर का ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

बजता है नाम उन का दिल की धड़क धड़क मेंसाँसों में गूँजता है तराना हुज़ूर का

जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का

खोया है उन के नाम में, सीरत के काम मेंदीवाना बन गया है उजागर हुज़ूर का

जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का

आए शाह-ए-अंबिया ! मरहबा या मुस्तफ़ा !क्या समाँ है नूर का ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

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