नात लिरिक्स

Barish-e-Rahmat-e-Kibriya Hai | Mustafa Rab Se Milne Chale Hain

बारिश-ए-रहमत-ए-किब्रिया है | मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सर-ए-ला-मकाँ से तलब हुईसू-ए-मुंतहा वो चले नबीकोई हद है उन के 'उरूज कीसल्लू 'अलैहि व आलिही

बारिश-ए-रहमत-ए-किब्रिया हैमुस्तफ़ा ला-मकाँ जा रहे हैंआज सारा जहाँ सज गया हैमुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

दस्त-बस्ता मलाइक खड़े हैंना'त सरकार की पढ़ रहे हैंहूर-ओ-ग़िलमाँ के लब पर सदा हैमुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

जश्न में ज़र्रा ज़र्रा मगन हैहर तरफ़ बजते हैं शादियानेबहर-ए-ता'ज़ीम का'बा झुका हैमुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

अंबिया-ओ-रुसुल मुक़्तदी हैंऔर इमामत पे मेरे नबी हैं'अर्श पर मरहबा की सदा हैमुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

पहुँचे सिदरा पे सरकार जिस दमबोले जिब्रील, ऐ शाह-ए-'आलम !बस यहीं पर मेरी इंतिहा हैमुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

है दुरूदों की दस्तार सर परहै सलामी फ़रिश्तों के लब परपहुँचा महबूब क़ुर्ब-ए-ख़ुदा हैमुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

ये क़सीदा, ऐ शौक़-ए-फ़रीदी !तुम ने लिक्खा है जो फ़ज़्ल-ए-रब्बीसदक़ा वल्लाह मे'राज का हैमुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं

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