नात लिरिक्स

Aa Gaya Mah-e-Ramzan Hai

आ गया माह-ए-रमज़ान है

नात ख़्वान: Hafiz Tahir Qadriशायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ रहमत-ए-रमज़ान ! ऐ रहमत-ए-रमज़ान !

रमज़ान के महीने में सारे रोज़े रक्खेंगेऔर नमाज़ें पढ़ के हम रब को राज़ी कर लेंगे

आ गया माह-ए-रमज़ान हैआ गया रब का मेहमान है

बज़्म-ए-इफ़्तार फिर से है सजने लगीफिर से रौनक़ मसाजिद की बढ़ने लगीशुक्र-ए-मौला कि ग़फ़लत उतरने लगीसारे सज्दे में सर को झुकाने लगे

आ गया माह-ए-रमज़ान हैआ गया रब का मेहमान है

बरकत है क्या ! क्या शान है ! रमज़ान तो रमज़ान हैसरकार का फ़ैज़ान है, रमज़ान तो रमज़ान है

आज घर पर है रोज़ा-कुशाई मेरीइस लिए प्यारी महफ़िल सजाई गईनन्ही नन्ही अदाओं से बच्चे सभीसब को महव-ए-मुसर्रत बताने लगे

आ गया माह-ए-रमज़ान हैआ गया रब का मेहमान है

रमज़ान के महीने में सारे रोज़े रक्खेंगेऔर नमाज़ें पढ़ के हम रब को राज़ी कर लेंगे

अज्र बढ़ने लगा नेक आ'माल काकैसा प्यारा महीना है ये साल काहाल बदला है हर एक बद-हाल काग़म के मारे सभी मुस्कुराने लगे

आ गया माह-ए-रमज़ान हैआ गया रब का मेहमान है

खुल गए जन्नतों के सभी रास्तेऔर अब्वाब-ए-दोज़ख़ को ताले लगेबेड़ियों में है शैतान जकड़े हुएग़म से घबरा के आँसू बहाने लगे

आ गया माह-ए-रमज़ान हैआ गया रब का मेहमान है

रमज़ान के महीने में सारे रोज़े रक्खेंगेऔर नमाज़ें पढ़ के हम रब को राज़ी कर लेंगे

लैलतुल-क़द्र में जागना है हमेंख़्वाब-ए-ग़फ़लत को भी छोड़ना है हमेंताक़ रातों में सब माँगना है हमेंता-कि नय्या हमारी ठिकाने लगे

आ गया माह-ए-रमज़ान हैआ गया रब का मेहमान है

फिर से आमद हुई माह-ए-रमज़ान कीफिर दिलों के चमन लहलहाने लगेचार-सू है सदा मरहबा मरहबाअहल-ए-ईमान ख़ुशियाँ मनाने लगे

फिर से रमज़ान की ये मुबारक घड़ीफ़ज़्ल-ए-रब्बुल-'उला से हमें मिल गईकर के, शौक़-ए-फ़रीदी ! तशक्कुर सभीबख़्त-ए-ख़ुफ़्ता को फिर से जगाने लगे

आ गया माह-ए-रमज़ान हैआ गया रब का मेहमान है

रमज़ान के महीने में सारे रोज़े रक्खेंगेऔर नमाज़ें पढ़ के हम रब को राज़ी कर लेंगे

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