नात लिरिक्स

Dard-e-Dil Kar Mujhe Ata Ya Rab

दर्द-ए-दिल कर मुझे अता या रब

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दर्द-ए-दिल कर मुझे 'अता, या रब !दे मेरे दर्द की दवा, या रब !

लाज रख ले गुनहगारों कीनाम रहमान है तेरा, या रब !

'ऐब मेरे न खोल महशर मेंनाम सत्तार है तेरा, या रब !

बे-सबब बख़्श दे, न पूछ 'अमलनाम ग़फ़्फ़ार है तेरा, या रब !

ज़ख़्म गहरा सा तेग़-ए-उल्फ़त कामेरे दिल को भी कर 'अता, या रब !

यूँ गुमूँ मैं कि तुझ से मिल जाऊँयूँ गुमा, इस तरह मिला, या रब !

भूल कर भी न आए याद अपनीमेरे दिल से मुझे भुला, या रब !

ख़ाक कर अपने आस्ताने कीयूँ हमें ख़ाक में मिला, या रब !

मेरी आँखें मेरे लिए तरसेंमुझ से ऐसा मुझे छुपा, या रब !

टीस कम हो न दर्द-ए-उल्फ़त कीदिल तड़पता रहे मेरा, या रब !

न भरें ज़ख़्म-ए-दिल हरे हो कररहे गुलशन हरा-भरा, या रब !

तेरी जानिब ये मुश्त-ए-ख़ाक उड़ेभेज ऐसी कोई हवा, या रब !

दाग़-ए-उल्फ़त की ताज़गी न घटेबाग़ दिल का रहे हरा, या रब !

सबक़त रहमती 'अला ग़दबीजब से तू ने सुना दिया, या रब !

आसरा हम गुनहगारों काऔर मज़बूत हो गया, या रब !

है अना 'इंद ज़न्नी 'अब्दी बीमेरे हर दर्द की दवा, या रब !

तू ने मेरे ज़लील हाथों मेंदामन-ए-मुस्तफ़ा दिया, या रब !

तू ने दी मुझ को ने'मत-ए-इस्लामफिर जमा'अत में ले लिया, या रब !

कर दिया तू ने क़ादरी मुझ कोतेरी क़ुदरत के मैं फ़िदा, या रब !

दौलतें ऐसी, ने'मतें इतनींबे-ग़रज़ तू ने कीं 'अता, या रब !

दे के लेते नहीं करीम कभीजो दिया, जिस को दे दिया, या रब !

तू करीम और करीम भी ऐसाकि नहीं जिस का दूसरा, या रब !

ज़न नहीं बल्कि है यक़ीन मुझेवो भी तेरा दिया हुवा, या रब !

होगा दुनिया में, क़ब्र-ओ-महशर मेंमुझ से अच्छा मु'आमला, या रब !

इस निकम्मे से काम ले ऐसेये निकम्मा हो काम का, या रब !

मुझे ऐसे 'अमल की दे तौफ़ीक़कि हो राज़ी तेरी रज़ा, या रब !

जिस ने अपने लिए बुराई कीहै ये नादान वो बुरा, या रब !

हर भले की भलाई का सदक़ाइस बुरे को भी कर भला, या रब !

मैं ने बनती हुई बिगाड़ी बातबात बिगड़ी हुई बना, या रब !

मेरी माँ, मेरी बहनें, भाँजे सबपाएँ आराम-ए-दो-सरा, या रब !

और भी जितने मेरे प्यारे हैंहाजतें सब की हों रवा, या रब !

मेरे अहबाब पर भी फ़ज़्ल रहेतेरा तेरे हबीब का, या रब !

अहल-ए-सुन्नत की हर जमा'अत परहर जगह हो तेरी 'अता, या रब !

दुश्मनों के लिए हिदायत कीतुझ से करता हूँ इल्तिजा, या रब !

तू हसन को उठा हसन कर केहो म'अल-ख़ैर ख़ातिमा, या रब !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।