नात लिरिक्स

Tamam Alam Ke Jinn-o-Insan Khushi Ke Naghmat Ga Rahe Hain

तमाम आलम के जिन्न-ओ-इंसाँ ख़ुशी के नग़मात गा रहे हैं

नात ख़्वान: सैफ़ रज़ा कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम 'आलम के जिन्न-ओ-इंसाँ ख़ुशी के नग़मात गा रहे हैंबनी है जिन के लिए ये दुनिया वो आज तशरीफ़ ला रहे हैं

सबा ने पूछा, ऐ फूल ! तेरा लिबास कितना महक रहा हैतो फूल बोला नबी के तलवों की हम भी ख़ैरात पा रहे हैं

ज़माना करवट बदल रहा है, हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैंमलाइका आमिना के आँगन में आज ख़ुशियाँ मना रहे हैं

नबी बचपना था क्या सलोना, कि चाँद था आप का खिलौनाकभी खिलौने को तोड़ते हैं, कभी खिलौना बना रहे हैं

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