नात लिरिक्स

Na Aisa Gumbad Na Aisa Rauza Na Shahar Aisa Janab Hoga

न ऐसा गुंबद न ऐसा रौज़ा न शहर ऐसा जनाब होगा

नात ख़्वान: सैफ़ रज़ा कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

न ऐसा गुंबद, न ऐसा रौज़ा, न शहर ऐसा, जनाब ! होगाजवाब होगा हर इक शहर का, मदीना तो ला-जवाब होगा

ब-रोज़-ए-महशर फ़रिश्ते मुझ को पकड़ के पूछेंगे तो कहूँगावो देखो आते हैं ग़ौस-ए-आ'ज़म, उन्हीं के आगे हिसाब होगा

वो फ़ाक़े पर पर्दा करने वाली, ब-रोज़-ए-महशर जब आएँगी तोनिदा ये होगी झुकाओ नज़रें, ये फ़ातिमा का हिजाब होगा

हुसैन वो जिस को फ़ातिमा ने सुनाया क़ुरआन बचपने मेंवो बा'द-ए-कर्बल बुलंद हो कर ख़ुदा की पढ़ता किताब होगा

ये आती जाती हुकूमतें हैं, ये आती जाती रहेंगी लेकिनमगर वो ख़्वाजा रहेगा राजा, उसी का राजा ख़िताब होगा

नबी का मेरे जो मो'जिज़ा है, जो रद में उस ने कहा लिखा हैब-रोज़-ए-महशर वो नजदियों पर रज़ा का फ़तवा 'अज़ाब होगा

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