नात लिरिक्स

Maut Ke Bhanwar Se Ya Nabi Bach Ke Baal Baal Aa Gaya

मौत के भँवर से या नबी बच के बाल-बाल आ गया

नात ख़्वान: सैफ़ रज़ा कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मौत के भँवर से, या नबी ! बच के बाल-बाल आ गयाख़ैर हो गई कि उस घड़ी आप का ख़याल आ गया

दो सवाल ख़त्म जब हुए, क़ब्र में दिवाना झूम उठाअब हुज़ूर होंगे सामने, तीसरा सवाल आ गया

रब ने तेरे घर को भर दिया, तुझ को माला-माल कर दियाऐ हलीमा ! तेरी गोद में आमिना का लाल आ गया

ज़िक्र-ए-मुस्तफ़ा की रात थी, हुस्न-ए-मुस्तफ़ा की बात थी'अक़्ल वाले सोचते रहे, 'आशिक़ों को हाल आ गया

ज़ुल्फ़िक़ार-ए-हैदरी चली, यूँ लगा कि आ गए 'अलीजब यज़ीदियों के सामने फ़ातिमा का लाल आ गया

था ग़ुरूर जिन को हुस्न पर, आ नहीं रहे हैं वो नज़रहुस्न-ए-'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा लिए हश्र में बिलाल आ गया

नज्दियों को मौत आ गई, सुन्नियों को ज़िंदगी मिलीजब रज़ा की बात छिड़ गई, 'इश्क़ में उछाल आ गया

क्या नहीं है उन के पास में, क्या नहीं है उन के हाथ मेंतेग़-'अली के दर पे जो गया, हो के माला-माल आ गया

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।