नात लिरिक्स

Jis Pe Aaqa Ka Naqsh-e-Pa Hota

जिस पे आक़ा का नक़्श-ए-पा होता

नात ख़्वान: सैफ़ रज़ा कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जिस पे आक़ा का नक़्श-ए-पा होतामेरा सीना वो रास्ता होता

खाते होते मेरे हुज़ूर ख़जूरगुठलियाँ मैं समेटता होता

आ रहे होते लेटने को हुज़ूरमैं चटाई बिछा रहा होता

मुँह धुलाता मैं सुब्ह-ए-दम उन काशाम को पाँव दाबता होता

पेड़ को देखता मैं चलते हुएजब इशारा हुज़ूर का होता

मुस्तफ़ा मुस्कुरा रहे होतेचाँद क़दमों को चूमता होता

ना'त हस्सान पढ़ रहे होतेमेरे होंठों पे मरहबा होता

मुझ से कहते वो मेरी ना'त पढ़ोकाश ! ऐसा कभी हुआ होता

मेरी आँखों पे नाज़ करते मलकजब मैं आक़ा को देखता होता

मेरे सीने पे हाथ रखते वोजब मेरा दिल तड़प रहा होता

उस घड़ी मौत मुझ को आ जातीवक़्त जब भी जुदाई का होता

काश ! इमामत मेरे नबी करतेजब जनाज़ा मेरा पड़ा होता

उन की मीलाद है वजह वर्नाकोई पैदा नहीं हुआ होता

उन को कहता कभी न अपनी तरहआईना तू जो देखता होता

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