नात लिरिक्स

Soya Hua Naseeb Tha Bedar Ho Gaya

सोया हुआ नसीब था बेदार हो गया

नात ख़्वान: नदीम रज़ा फ़ैज़ीशायर: नदीम रज़ा फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सोया हुआ नसीब था बेदार हो गयाजब ख़्वाब में हुज़ूर का दीदार हो गया

वो आदमी बहिश्त का हक़दार हो गयाजो भी मेरे नबी का वफ़ादार हो गया

देखा है जिस ने आँख से रौज़ा रसूल कावो आदमी बहिश्त का हक़दार हो गया

उस की ज़रूर होगी मदीने में हाज़रीजो मुस्तफ़ा के 'इश्क़ में बीमार हो गया

इस्लाम को लहू की ज़रुरत पड़ी तो फिरअसग़र भी तीर खाने को तय्यार हो गया

बोले 'उमर कि मेरा इरादा कुछ और थानज़रें मिली हुज़ूर से तो प्यार हो गया

बोले बिलाल पहले मैं अदना ग़ुलाम थाजब मिल गए हुज़ूर तो सरदार हो गया

दोज़ख़ की आग उस को जलाएगी किस तरहमेरा रसूल जिस का तरफ़-दार हो गया

जब से क़दम मुजाहिद-ए-मिल्लत के पड़ गएउस रोज़ से ओड़ीशा भी गुलज़ार हो गया

पढ़ने लगा है जब से रज़ा ख़ान का कलामऊँचा नदीम फ़ैज़ी का मे'यार हो गया

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