नात लिरिक्स

Chhod Kar Apna Ghar Soo-e-Tayba Nagar Band Aankhen Kiye Jo Nikal Jaega

छोड़ कर अपना घर सू-ए-तयबा नगर बंद आँखें किए जो निकल जाएगा

नात ख़्वान: नदीम रज़ा फ़ैज़ीशायर: नदीम रज़ा फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

छोड़ कर अपना घर, सू-ए-तयबा नगरबंद आँखें किए जो निकल जाएगाउस की आँखें खुलेंगी मदीने में जबदेख कर सब्ज़-गुंबद मचल जाएगा

हम गुनहगारों को ले के मीज़ान सेसू-ए-दोज़ख़ फ़रिश्ते चलेंगे मगररहमत-ए-दो-जहाँ जब चले आएँगेहश्र का सारा नक़्शा बदल जाएगा

याद रखना रईस-ए-ओड़ीशा को तुमऔर बयाँ करना उन की 'अक़ीदत को तुमऐसा शेर-ए-रज़ा है मुजाहिद मेरानाम से ही मुनाफ़िक़ दहल जाएगा

घर से निकलूँगा मैं जब सफ़र के लिएसाथ हो जाएगी मेरी माँ की दु'आआने वाला बलाओं का तूफ़ान भीदेख लेना मेरे सर से टल जाएगा

ग़ौर से सुन ले तू, ऐ नदीम-ए-रज़ा !तुम से कहता है 'इश्क़-ए-हबीब-ए-ख़ुदाउस को तयबा बुलाएँगे ख़ैर-उल-वरा'इश्क़-ए-सरकार में जो भी ढल जाएगा

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