नात लिरिक्स

Dil Ko Dard-e-Hijr Mein Kab Tak Rulaya Jayega | Ya Nabi Hum Ko Madina Kab Bulaya Jayega

दिल को दर्द-ए-हिज्र में कब तक रुलाया जाएगा | या नबी हम को मदीना कब बुलाया जाएगा

नात ख़्वान: नदीम रज़ा फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दिल को दर्द-ए-हिज्र में कब तक रुलाया जाएगाया नबी ! हम को मदीना कब बुलाया जाएगा

आओ किरदार-ए-नबी का बाब फिर खोलें ज़राआज फिर चूल्हा ग़रीबों का जलाया जाएगा

फ़ातिमा ! घर पर तेरे आए हैं जिब्रील-ए-अमींलगता है हसनैन को झूला झुलाया जाएगा

एक सज्दे में शहादत क्यूँ हुई शब्बीर कीदूसरा सज्दा क़यामत में निभाया जाएगा

एक असग़र ही नहीं हक़ की हिफ़ाज़त के लिएसैकड़ों असग़र को हँस हँस के लुटाया जाएगा

ढाल बन कर करता है औलाद की जो परवरिशबाप के एहसान को कैसे भुलाया जाएगा

बाप की ले ले जगह जो बाप के जाने के बा'दउस बड़े भाई को पलकों पर बिठाया जाएगा

कौन हाथों से खिलाएगा निवाला अब मुझेमाँ ! तुझे तो छोड़ कर कुछ भी न खाया जाएगा

सुन्नियत पर होगा जब हमला तो बन कर ख़ाकसारबेलचा मर्द-ए-मुजाहिद का उठाया जाएगा

पीर लाखों हैं जहाँ में, हाँ मगर ऐ अज़हरी !ग़ुस्ल-ए-का'बा के लिए तुम को बुलाया जाएगा

आ'ला हज़रत के मिशन का जो बनेगा पहरे-दारदीन-ओ-मिल्लत का हबीब उस को बनाया जाएगा

दुश्मन-ए-अहमद-रज़ा भागेगा मैदाँ छोड़ करजब बरेली वाले का ना'रा लगाया जाएगा

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