नात लिरिक्स

Mujh Ko Taiba Nagar Ka Pata Mil Gaya

मुझ को तयबा नगर का पता मिल गया

नात ख़्वान: नदीम रज़ा फ़ैज़ीशायर: नदीम रज़ा फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुझ को तयबा नगर का पता मिल गयाजब बरेली का अहमद रज़ा मिल गया

नार-ए-दोज़ख़ का खटका नहीं अब मुझेहाथ में दामन-ए-मुस्तफ़ा मिल गया

आ'ला हज़रत से, ख़्वाजा से और ग़ौस सेनिस्बतें क्या हुईं कि ख़ुदा मिल गया

मुझ को भटका सकेगा न नज्दी कभीजब मेरा वो सनम रहनुमा मिल गया

ग़ौस की जब निगाह-ए-विलायत पड़ीडूबी कश्ती मिली, क़ाफ़िला मिल गया

मेरे माँ-बाप ने जब दु'आ दी मुझेना'त पढ़ने का फिर हौसला मिल गया

माँ तेरे क़दमों को रोज़ मैं चूम लूँतेरा क़ुरआन में मर्तबा मिल गया

याद आए बहुत असग़र-ए-शीर-ख़्वारजब तसव्वुर को कर्ब-ओ-बला मिल गया

दामन-ए-अज़हरी मेरे हाथों में हैअब मुझे ख़ुल्द का रास्ता मिल गया

और क्या चाहिए बोलो बोलो, नदीम !जब मुझे वो मुजाहिद मेरा मिल गया

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