नात लिरिक्स

Sayyid-ul-Ambiya Khatim-ul-Mursaleen Un Ke Jaisa Na Jag Mein Koi Aaega

सय्यिद-उल-अम्बिया ख़ातिम-उल-मुर्सलीं उन के जैसा न जग में कोई आएगा

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सय्यिद-उल-अम्बिया, ख़ातिम-उल-मुर्सलींउन के जैसा न जग में कोई आएगासब से अफ़ज़ल-ओ-आ'ला हैं बा'द-ए-ख़ुदाउन की अज़मत कोई क्या समझ पाएगा

बोले सिदरा-मकीं, मैंने देखा नहींसारे 'आलम में आक़ा के जैसा हसींजब किसी माँ ने ऐसा जना ही नहींमिस्ल उन का भला कैसे मिल पाएगा

हूर-ओ-ग़िल्माँ भी आते हैं शाम-ओ-सहरऐसा नूरानी है मेरे आक़ा का दरमैं भी जाऊँगा इक रोज़ तयबा नगरइंशाअल्लाह ! वो दिन भी जल्द आएगा

ख़ालिक़-ए-कुल के महबूब हैं पंज-तनउन के दम से है रौशन ज़मीन-ओ-ज़मनउन के शैदा हैं हम सारे अहल-ए-सुननहम को बख़्शिश का परवाना मिल जाएगा

मर्तबा है बड़ा सारे असहाब काहै मगर चार यारों का रुत्बा बड़ाजिस ने इन चार से बुग़्ज़-ओ-कीना रखाख़ुश्बू-ए-ख़ुल्द को भी तरस जाएगा

यूँही, शौक़-ए-फ़रीदी ! करो मिदहतेंहोंगी तुझ पर भी अल्लाह की रहमतें'उम्र में, 'इल्म में देगा रब बरकतेंऔर मुक़द्दर भी तेरा सँवर जाएगा

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