नात लिरिक्स

Aaqa Pe Dil-o-Jaan Se Qurban Raza Hain

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: तफ़्सीर रज़ा अम्जदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं'उश्शाक़ की फ़ेहरिस्त में ज़ीशान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

हैं बहर-ए-'अदू क़हर-ए-ख़ुदा सैफ़-ए-'अली वोसुन्नी के लिए 'इश्क़ का गुलदान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

क़ुर्बान मेरी जान कि इस दौर में कोईउन सा नहीं इंसान, वो इंसान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

जो बिक नहीं सकता कभी पैसों से जहाँ मेंहम अहल-ए-मोहब्बत का वो सामान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

बस मैं ही नहीं करता हूँ तस्लीम ये बल्किकहते हैं सभी, हिन्द के हस्सान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

आती है बरेली से हमें तयबा की ख़ुश्बूगुलज़ार-ए-मदीना का ही फ़ैज़ान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

जिस ने भी पढ़ा उन को, बना 'आशिक़-ए-सादिक़वो 'इश्क़ से मा'मूर गुलिस्तान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

पाँव मेरा फिसले रह-ए-हक़ से नहीं मुम्किनहर मोड़ पे ख़ुद मेरे निगहबान रज़ा हैं

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

सरकार की नामूस पे जो करता है तनक़ीदउन के लिए बर्बादी का तूफ़ान रज़ा है

आक़ा पे दिल-ओ-जान से क़ुर्बान रज़ा हैं

जब क़ब्र में, तफ़्सीर ! सवालात हों तुम सेउस वक़्त ये कह देना मेरी जान रज़ा हैं

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।