नात लिरिक्स

Aye Shah-e-Karbala Sun Lo Arzi Meri

ऐ शह-ए-कर्बला सुन लो अर्ज़ी मेरी

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ शह-ए-कर्बला ! सुन लो 'अर्ज़ी मेरीलाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

मैं तेरे दर का इक अदना गदा हूँबचपन से ही, मौला ! तुझ पे फ़िदा हूँकर दो नज़र-ए-करम, वासिता मुर्तज़ा कालाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

ऐ शह-ए-कर्बला ! सुन लो 'अर्ज़ी मेरीलाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

हुर्र ने कहा मुझ को, मौला ! बचा लोज़ालिम के पंजे से मुझ को निकालोबख़्श दो हर ख़ता अज़ प-ए-मुस्तफ़ालाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

ऐ शह-ए-कर्बला ! सुन लो 'अर्ज़ी मेरीलाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

बेहद परेशान हैं, मेरे मौला !हिन्द में शाह-ए-मदीना के शैदादूर हो हर मुसीबत ये कर दो दु'आलाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

ऐ शह-ए-कर्बला ! सुन लो 'अर्ज़ी मेरीलाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

'अब्बास-ओ-अकबर-ओ-असग़र को तुम नेक़ुर्बां किया है बहत्तर को तुम नेदीन-ए-इस्लाम पर है ये एहसाँ तेराकैसे भूले कोई, कैसे भूले कोई

ऐ शह-ए-कर्बला ! सुन लो 'अर्ज़ी मेरीलाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

इस 'अब्द-ए-क़ादिर की भी सारी 'अर्ज़ीऔर सारे अश'आर-ए-शौक़-ए-फ़रीदीकर लो मक़बूल बहर-ए-हसन-मुज्तबाइब्न-ए-मौला 'अली ! इब्न-ए-मौला 'अली !

ऐ शह-ए-कर्बला ! सुन लो 'अर्ज़ी मेरीलाज रख लो मेरी, इब्न-ए-मौला 'अली !

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