नात लिरिक्स

Jahan Bhi Ho Wahin Se Do Sada Sarkar Sunte Hain

जहाँ भी हो वहीं से दो सदा सरकार सुनते हैं

नात ख़्वान: सय्यिद ज़बीब मसूदशायर: मुज़फ्फर वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जहाँ भी हो वहीं से दो सदा सरकार सुनते हैंसर-ए-आईना सुनते हैं, पस-ए-दीवार सुनते हैं

मेरी हर साँस उन की आहटों के साथ चलती हैमेरे दिल के धड़कने की भी वो रफ़्तार सुनते हैं

गुनहगारो ! दुरूद-ए-वालिहाना भेज कर देखोवो अपने उम्मती का नग़्मा-ए-किरदार सुनते हैं

खड़े रहते हैं अहल-ए-तख़्त भी दहलीज़ पर उन कीफ़क़ीरों की सदाएँ भी शह-ए-अबरार सुनते हैं

मैं सदक़े जाऊँ उन की रहमतुल-लिल-'आलमीनी केपुकारो चाहे कितनी बार वो हर बार सुनते हैं

वो यूँ मिलते हैं जैसे ज़िंदगी में कोई मिलता हैवो सुनते हैं हर इक की और सर-ए-दरबार सुनते हैं

मुज़फ्फर ! जब किसी महफ़िल में उन की ना'त पढ़ता हूँमेरा ईमान है वो भी मेरे अश'आर सुनते हैं

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