नात लिरिक्स

Mujh Khata-kar Sa Insan Madine Mein Rahe | Mujh Khatakar Sa Insan Madine Mein Rahe

मुझ ख़ता-कार सा इंसान मदीने में रहे

नात ख़्वान: सय्यिद ज़बीब मसूदशायर: मुहम्मद आ'ज़म चिश्तीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुझ ख़ता-कार सा इंसान मदीने में रहेबन के सरकार का मेहमान मदीने में रहे

याद आती है मुझे अहल-ए-मदीना की वो बातज़िंदा रहना हो तो इंसान मदीने में रहे

अल्लाह अल्लाह ! सर-अफ़राज़ी-ए-सहरा-ए-हिजाज़सारी मख़्लूक़ का सुल्तान मदीने में रहे

दूर रह कर भी उठाता हूँ हुज़ूरी के मज़ेमैं यहाँ और मेरी जान मदीने में रहे

यूँ अदा करते हैं 'उश्शाक़ मोहब्बत की नमाज़सज्दा का'बे में हो और ध्यान मदीने में रहे

उन की शफ़क़त ग़म-ए-कौनैन भुला देती हैजितने दिन आप का मेहमान मदीने में रहे

छोड़ आया हूँ दिल-ओ-जान ये कह कर, आ'ज़म !आ रहा हूँ, मेरा सामान मदीने में रहे

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