नात लिरिक्स

Mustafa Ki Nazar Mein Rehta Hoon

मुस्तफ़ा की नज़र में रहता हूँ

नात ख़्वान: सय्यिद ज़बीब मसूदशायर: मौलाना नसीर अहमद नसीर सिराजीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुस्तफ़ा की नज़र में रहता हूँकितने महफूज़ घर में रहता हूँ

साया-ए-मुस्तफ़ा है मेरा मकाँमैं शफ़ा'अत नगर में रहता हूँ

बाग़-ए-तयबा की जुस्तुजू है मुझेजन्नती रहगुज़र में रहता हूँ

याद आती है जब भी ज़ुल्फ़-ए-हुज़ूरख़ुश्बुओं के असर में रहता हूँ

जब भी सोता हूँ ना'त पढ़ते हुएरात को भी सहर में रहता हूँ

'अर्श-ए-आ'ज़म से राबिता है मेराक़ुर्ब-ए-ख़ैर-उल-बशर में रहता हूँ

मेरी मंज़िल है बस रज़ा-ए-रसूलमैं मुसलसल सफ़र में रहता हूँ

अब लगा दे मुझे भी साहिल सेउलझनों के भँवर में रहता हूँ

मुझ पे साया है रहमतों का, नसीर !'अर्सा-ए-बे-ख़तर में रहता हूँ

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।