नात लिरिक्स

Kaun Samjhega Yahan Dard Hamare Sare

कौन समझेगा यहाँ दर्द हमारे सारे

नात ख़्वान: सय्यिद ज़बीब मसूदशायर: हस्सान-उल-मुस्तफ़ाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कौन समझेगा यहाँ दर्द हमारे सारेआओ तयबा को चलें दर्द के मारे सारे

हम फ़क़ीरों को जहाँ भी तेरी ख़ुश्बू आईबस वहीं बैठ गए झोली पसारे सारे

क्या कहूँ, ऐ मेरे लजपाल ! कि जी जानता हैकैसे फ़ुर्क़त में शब-ओ-रोज़ गुज़ारे सारे

इक नज़र गुंबद-ए-ख़ज़रा पे पड़ी और यकसरभूलते ही गए दुनिया के नज़ारे सारे

मेरी आँखों को यूँ अज़्बर है मदीना साराजैसे हुफ़्फ़ाज़ को हों याद सिपारे सारे

पेश-ए-नज़्ज़ारा हो जब हुस्न-ए-अतम का सूरजफिर नज़र आते नहीं चाँद-सितारे सारे

हम ने असहाब से, हस्सान ! ये कहना सीखातुझ पे क़ुर्बान हों हम और हमारे सारे

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