नात लिरिक्स

Rakh Len Wo Jo Dar Par Mujhe Darban Waghaira

रख लें वो जो दर पर मुझे दरबान वग़ैरा

नात ख़्वान: सय्यिद ज़बीब मसूदशायर: सुल्तान महमूद हाश्मीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रख लें वो जो दर पर मुझे दरबान वग़ैराफिर क्या है मेरे सामने सुल्तान वग़ैरा

ख़ैरात मिली हो जिन्हें सरकार के दर सेदुनिया के उठाते नहीं एहसान वग़ैरा

आक़ा की चटाई की तो वो शान है वल्लाहबस नाम के हैं तख़्त-ए-सुलैमान वग़ैरा

बनना है मुझे ख़ाक-ए-रह-ए-शहर-ए-मदीनाबन कर मुझे रहना नहीं मेहमान वग़ैरा

तासीर-ए-लु'आब-ए-दहन-ए-पाक है ऐसीसर क़दमों में रख देते हैं लुक़मान वग़ैरा

बू-सीरी की इक ना'त ने वो रंग जमायालोगों के धरे रह गए दीवान वग़ैरा

हो हुक्म तो ले आऊँ मैं जन्नत में उन्हें भीकुछ रह गए बाक़ी जो सना-ख़्वान वग़ैरा

आएँ तो सही आप के मँगते के मुक़ाबिलजितने भी ज़माने के हैं सुल्तान वग़ैरा

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