नात लिरिक्स

Raatein Bhi Madine Ki, Baatein Bhi Madine Ki

रातें भी मदीने की, बातें भी मदीने की

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रातें भी मदीने की, बातें भी मदीने कीजीने में ये जीना है, क्या बात है जीने की

'अर्सा हुआ तयबा की गलियों से वो गुज़रे हैंइस वक़्त भी गलियों में ख़ुश्बू है पसीने की

ता'रीफ़ के लाइक़ जब अल्फ़ाज़ नहीं मिलतेता'रीफ़ करे कोई किस तरह मदीने की

वो अपनी निगाहों से दीवाना बनाते हैंज़हमत भी नहीं देते मय-ख़्वार को पीने की

ये ज़ख़्म है तयबा का, ये सब को नहीं मिलताकोशिश न करे कोई इस ज़ख़्म को सीने की

हर साल बुलाने का है राज़ यही, मिर्ज़ा !सरकार बनाते हैं तक़दीर कमीने की

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