नात लिरिक्स

Qibla-e-Barkat Hain Ya Ghaus-e-Azam Dastagir

क़िब्ला-ए-बरकात हैं या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर

नात ख़्वान: राओ अली हसनैनशायर: वसीम बेख़ुदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !क़ाज़ी-उल-हाजात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क्या मेरी औक़ात है, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !आप की सब बात है, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

रोज़-ओ-शब यूँ लम्हा लम्हा आप के दरबार मेंनूर की बरसात है, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

आज तक दुनिया ने देखा आप के इक नाम सेकाँपते जिन्नात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

जो तिराए डूबी कश्ती और भर दे झोलियाँआप महव-ए-ज़ात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

मुझ को दामन से, ए बेख़ुद ! मग़्फ़िरत की बा-ख़ुदामिल गई सौग़ात है, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !क़ाज़ी-उल-हाजात हैं, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

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