नात लिरिक्स

Haj Pe Bula, Maula ! Haj Pe Bula, Kaa'ba Dikha, Maula ! Kaa'ba Dikha

हज पे बुला, मौला ! हज पे बुला, का'बा दिखा, मौला ! का'बा दिखा

नात ख़्वान: क़ुरैशी ब्रदर्सशायर: वसीम बेख़ुदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हज पे बुला, मौला !हज पे बुला, मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !का'बा दिखा दे, मौला !

हज पे बुला, मौला ! हज पे बुलाका'बा दिखा, मौला ! का'बा दिखा

मेरे दिल में जो छुपा हैतेरे पे सब कुछ 'अयाँ हैबस इक यही है दु'आ

दिल को मेरे जुस्तुजू हैतेरे दर की आरज़ू हैकर दे पूरी इल्तिजा

सारी ख़ताएँ, मौला ! कर दे मु'आफ़काश ! करें हम तेरे घर का तवाफ़और फिर हमें तू, मौला ! ज़मज़म पिला

हज पे बुला, मौला ! हज पे बुलाका'बा दिखा, मौला ! का'बा दिखा

जिस के जल्वे हैं नज़र मेंया'नी आक़ा के नगर मेंहम को तू पहुँचा, ख़ुदा !

सब की आरज़ू भी ये हैसब की जुस्तुजू भी ये हैसब के दिलों की सदा

दिल में, नज़र में बसे जल्वेरोज़ ये अरमाँ मचे दिल मेंकर लें नज़ारा हम भी तेरे दर का

हज पे बुला, मौला ! हज पे बुलाका'बा दिखा, मौला ! का'बा दिखा

हम को मक्के में बुलानाफिर मदीना भी दिखानाफिर हम करें जाँ फ़िदा

पास मेरे ज़र नहीं हैउड़ने को भी पर नहीं हैआह ! बेख़ुद भी न जा सका

सू-ए-हरम क़ाफ़िला अब चलामैं न यहीं रह जाऊँ, ख़ुदा !अब कोई बहाना, मौला ! तू ही बना

हज पे बुला, मौला ! हज पे बुलाका'बा दिखा, मौला ! का'बा दिखा

ए मेरे मेहरबाँ !ए कुल्ल-ए-राज़-दाँ !ए ख़ालिक़-ए-मकाँ !ए मालिक-ए-जहाँ !

तेरा दर दिखा दे क़रीब सेये सदा है क़ल्ब-ए-ग़रीब से

हाँ ! फ़क़ीर हैं, हाँ ! असीर हैंगुनहगार हैं, बद-कार हैं

इतना करम हम पर हो जाएहम भी तेरे दरबार में आएँ

इक दिन तो ऐसा भी आएचक्कर तेरे घर के लगाएँ

तेरे नाम की तस्बी करें हमफिर सज्दे में सर को झुकाएँ

देख के तेरे घर को, मौला !दिल ये ख़ुशी में झूमता जाए

अपनी ख़ताएँ याद करें औरआँखों से अश्कों को बहाएँ

और आख़िर में, पाक हरम मेंबेख़ुद ! हम को मौत आ जाए

शान से निकले अपना जनाज़ाऔर वहीं दफ़नाए जाएँ

ए काश ! हो मुक़द्दरमौत आए तेरे दर पर

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