नात लिरिक्स

Qasam Khuda Ki Main Hun Ashraf Ka Deewana

क़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: मशहूद रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सरवरा शाहा करीमा दस्तगीरा अशरफ़ाहुर्मत-ए-रूह-ए-पयंबर यक नज़र कुन सू-ए-मा

मुझ पर क्यूँ न नाज़ करें ये शाहान-ए-ज़मानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मेरे आक़ा, जान-ए-'आलम का तुझ पर फ़ैज़ान हैइस लिए ही कोह से भी ऊँची तेरी शान हैबिगड़ी क़िस्मत मेरी आ कर ख़्वाब में बनानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मुझ पर क्यूँ न नाज़ करे ये शाहान-ए-ज़मानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

तुम तो गुल-ए-बाग़-ए-मौला हैदर-ए-कर्रार होतुम तो हो 'अता-ए-मीराँ मुहियुद्दीं सरकार होरोज़-ए-महशर मुझ को अपने दामन में छुपानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मुझ पर क्यूँ न नाज़ करे ये शाहान-ए-ज़मानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

ग़ौस-ए-आ'ज़म, शाह-ए-जीलाँ के नूरी दरबार सेख़्वाजा-ए-अजमेरी पिया हिन्द की सरकार सेपंजतन का पाक सदक़ा मुझ को भी दिलवानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मुझ पर क्यूँ न नाज़ करे ये शाहान-ए-ज़मानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मुझ पे रंग-ए-अशरफ़ी मेरे अशरफ़ ने चढ़ाया हैमक्र-ए-शैताँ के मुझे आसेब से बचाया हैमख़्दूम-ए-सिमनानी की ये ज़ात है यगानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मुझ पर क्यूँ न नाज़ करे ये शाहान-ए-ज़मानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

देखा है मैं ने अक्सर वहाँ आँखों से ये जा करकरते हैं सुब्ह-ओ-मसा जहाँ चाकरी गदागरशहर-ए-मुक़द्दस क्या तेरा किछौछा है सुहानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मुझ पर क्यूँ न नाज़ करे ये शाहान-ए-ज़मानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मशहूद-ए-रज़ा ! मैं शाह-ए-सिमनाँ का गदा हूँफ़ज़्ल-ए-ख़ुदा है दिल-ओ-जान से फ़िदा हूँमेरे लब पर क्यूँ न हो फिर इन का तरानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

मुझ पर क्यूँ न नाज़ करे ये शाहान-ए-ज़मानाक़सम ख़ुदा की मैं हूँ अशरफ़ का दीवाना

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