नात लिरिक्स

Qalb-e-Aashiq Hai Ab Para Para | Alvida Alvida Mahe Ramzan

क़ल्ब-ए-आशिक़ है अब पारा पारा | अलविदा अलविदा माह-ए-रमज़ाँ

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क़ल्ब-ए-'आशिक़ है अब पारा पाराअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !कुल्फ़त-ए-हिज्र-ओ-फ़ुर्क़त ने माराअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

तेरे आने से दिल ख़ुश हुआ थाऔर ज़ौक़-ए-'इबादत बढ़ा थाआह ! अब दिल पे है ग़म का ग़लबाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

मस्जिदों में बहार आ गई थीजूक़-दर-जूक़ आते नमाज़ीहो गया कम नमाज़ों का जज़्बाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

बज़्म-ए-इफ़्तार सजती थी कैसी !ख़ूब सहरी की रौनक़ भी होतीसब समाँ हो गया सूना सूनाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

तेरे दीवाने अब रो रहे हैंमुज़्तरिब सब के सब हो रहे हैंहाए ! अब वक़्त-ए-रुख़्सत है आयाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

तेरा ग़म हम को तड़पा रहा हैआतिश-ए-शौक़ भड़का रहा हैफट रहा है तेरे ग़म में सीनाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

याद रमज़ाँ की तड़पा रही हैआँसूओं की झड़ी लग गई हैकह रहा है ये हर एक क़तराअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

हसरता ! माह-ए-रमज़ाँ की रुख़्सतक़ल्ब-ए-'उश्शाक़ पर है क़ियामतकौन देगा उन्हें अब दिलासाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

तुम पे लाखों सलाम, माह-ए-ग़ुफ़राँ !अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !जाओ हाफ़िज़ ख़ुदा अब तुम्हाराअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

नेकियाँ कुछ न हम कर सके हैंआह ! 'इस्याँ में ही दिन कटे हैंहाए ! ग़फ़्लत में तुझ को गुज़ाराअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

वासिता तुझ को मीठे नबी काहश्र में हम को मत भूल जानारोज़-ए-महशर हमें बख़्शवानाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

जब गुज़र जाएँगे माह ग्यारहतेरी आमद का फिर शोर होगाक्या मेरी ज़िंदगी का भरोसाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

माह-ए-रमज़ाँ की रंगीं फ़ज़ाओ !अब्र-ए-रहमत से मम्लू हवाओं !लो सलाम आख़िरी अब हमाराअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

कुछ न हुस्न-ए-'अमल कर सका हूँनज़्र चंद अश्क़ मैं कर रहा हूँबस यही है मेरा कुल असासाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

हाए ! 'अत्तार-ए-बद-कार काहिलरह गया ये 'इबादत से ग़ाफ़िलइस से ख़ुश हो के होना रवानाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

साल-ए-आयिंदा, शाह-ए-हरम ! तुमकरना 'अत्तार पर ये करम तुमतुम मदीने में रमज़ाँ दिखानाअल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ !

क़ल्ब-ए-'आशिक़ है अब पारा पाराअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँकुल्फ़त-ए-हिज्र-ओ-फ़ुर्क़त ने माराअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

तेरे आने से दिल ख़ुश हुआ थाऔर ज़ौक़-ए-'इबादत बढ़ा थाआह ! अब दिल पे है ग़म का ग़लबाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

मस्जिदों में बहार आ गई थीजूक़-दर-जूक़ आते नमाज़ीहो गया कम नमाज़ों का जज़्बाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

बज़्म-ए-इफ़्तार सजती थी कैसी !ख़ूब सहरी की रौनक़ भी होतीसब समाँ हो गया सूना सूनाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

तेरे दीवाने अब रो रहे हैंमुज़्तरिब सब के सब हो रहे हैंहाए ! अब वक़्त-ए-रुख़्सत है आयाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

तेरा ग़म हम को तड़पा रहा हैआतिश-ए-शौक़ भड़का रहा हैफट रहा है तेरे ग़म में सीनाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

याद रमज़ाँ की तड़पा रही हैआँसूओं की झड़ी लग गई हैकह रहा है ये हर एक क़तराअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

हसरता ! माह-ए-रमज़ाँ की रुख़्सतक़ल्ब-ए-'उश्शाक़ पर है क़ियामतकौन देगा उन्हें अब दिलासाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

तुम पे लाखों सलाम, आह ! रमज़ाँअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँजाओ हाफ़िज़ ख़ुदा अब तुम्हाराअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

नेकियाँ कुछ न हम कर सके हैंआह ! 'इस्याँ में ही दिन कटे हैंहाए ! ग़फ़्लत में तुझ को गुज़ाराअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

वासिता तुझ को मीठे नबी काहश्र में हम को मत भूल जानारोज़-ए-महशर हमें बख़्शवानाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

जब गुज़र जाएँगे माह ग्यारहतेरी आमद का फिर शोर होगाक्या मेरी ज़िंदगी का भरोसाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

माह-ए-रमज़ाँ की रंगीं फ़ज़ाओ !अब्र-ए-रहमत से मम्लू हवाओं !लो सलाम आख़िरी अब हमाराअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

कुछ न हुस्न-ए-'अमल कर सका हूँनज़्र चंद अश्क़ मैं कर रहा हूँबस यही है मेरा कुल असासाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

हाए ! 'अत्तार-ए-बद-कार काहिलरह गया ये 'इबादत से ग़ाफ़िलइस से ख़ुश हो के होना रवानाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

साल-ए-आयिंदा, शाह-ए-हरम ! तुमकरना 'अत्तार पर ये करम तुमतुम मदीने में रमज़ाँ दिखानाअल-वदा' अल-वदा', आह ! रमज़ाँ

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