नात लिरिक्स

Qadri Aastana Salamat Rahe | Qadri Astana Salamat Rahe | Mustafa Ka Gharana Salamat Rahe

क़ादरी आस्ताना सलामत रहे | मुस्तफ़ा का घराना सलामत रहे

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क़ादरी आस्ताना सलामत रहेमुस्तफ़ा का घराना सलामत रहे

पल रहे हैं जहाँ से ये दोनों जहाँवो सख़ी आस्ताना सलामत रहे

पल रहे हैं जहाँ से ये शाह-ओ-गदावो सख़ी आस्ताना सलामत रहे

दर्दमंदों के सर पर है साया-फ़िगनआप का शामियाना सलामत रहे

तुम से मंसूब है ज़िंदगी का निसाबहश्र तक ये फ़साना सलामत रहे

ये नकीरैन बोले मुझे क़ब्र मेंमुस्तफ़ा का दीवाना सलामत रहे

हुक्म था कि अदा हों नमाज़ें पचासआप का आना-जाना सलामत रहे

है क़यामत तलक हर ज़माना तेरातेरा हर इक ज़माना सलामत रहे

ग़ौस की महफ़िलें फिर से सजने लगींसुन्नियों का घराना सलामत रहे

'इत्रत-ए-फ़ातिमा पर उजागर निसारसय्यिदा का घराना सलामत रहे

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।