नात लिरिक्स

Pandra Sau Sala Jashn Hai Rab Ke Habib Ka

पंद्रह सौ साला जश्न है रब के हबीब का

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: शौक़ फ़रीदी इंडियाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आ गए सरकार मेरे आ गए सरकार

मेरे आक़ा आए ! मरहबा !मेरे दाता आए ! मरहबा !मेरे मौला आए ! मरहबा !मेरे दाता आए ! मरहबा !

पंद्रह सौ साला जश्न है रब के हबीब काहर बच्चा मेरे शहर का कहता है मरहबा

जिब्रील ने का'बे पर परचम लहराया हैआमद का ज़माने को पैग़ाम सुनाया हैख़ुद रब्ब-ए-दो-'आलम ने मीलाद मनाया हैहम लोग तो बंदे हैं, क्यूँकर न मनाएँगे

झंडे लगाएँगे, घर को सजाएँगे, धूमें मचाएँगेआ गए हैं प्यारे मुस्तफ़ामहफ़िल सजाएँगे, ना'रे लगाएँगे, सब को बताएँगेआ गए हैं प्यारे मुस्तफ़ालंगर खिलाएँगे, शरबत पिलाएँगे, नग़्मे सुनाएँगेआ गए हैं प्यारे मुस्तफ़ा

उँगली के इशारों से जो चाँद से खेले हैंइक पल में ज़मीं से जो मे'राज को पहुँचे हैंजिब्रील-ए-अमीं जिन की ता'ज़ीम को झुकते हैंबी आमिना के घर पर तशरीफ़ वो लाए हैं

पंद्रह सौ साला जश्न है रब के हबीब काहर बच्चा मेरे शहर का कहता है मरहबा

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-नबी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !महफ़िल-ए-ज़िक्र-ए-ना'त-ए-नबी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !शाद हुआ हर इक सुन्नी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !दिल की धड़कन झूम उठी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !

जो आज ज़माने में हर सम्त उजाला हैये रब की क़सम उस के क़दमों का उतारा हैजो सारे रसूलों का, नबियों का आक़ा हैइंसान की सूरत में दुनिया में वो आया है

पंद्रह सौ साला जश्न है रब के हबीब काहर बच्चा मेरे शहर का कहता है मरहबा

शैतान के चेले जो कहते हैं इसे बिद'अतअफ़सोस उन्हों ने तो सीखी ही नहीं उल्फ़तपछताएँगे महशर में, पाएँगे बड़ी ज़िल्लतसरकार-ए-मदीना को क्या चेहरा दिखाएँगे

झंडे लगाएँगे, घर को सजाएँगे, धूमें मचाएँगेआ गए हैं प्यारे मुस्तफ़ामहफ़िल सजाएँगे, ना'रे लगाएँगे, सब को बताएँगेआ गए हैं प्यारे मुस्तफ़ालंगर खिलाएँगे, शरबत पिलाएँगे, नग़्मे सुनाएँगेआ गए हैं प्यारे मुस्तफ़ा

मिस्कीनों यतीमों को हम खाना खिलाएँगेशरबत की सबीलें भी हर-गाम लगाएँगेदुनिया को मोहब्बत का पैग़ाम सुनाएँगेइम्साल हम कुछ ऐसे मीलाद मनाएँगे

पंद्रह सौ साला जश्न है रब के हबीब काहर बच्चा मेरे शहर का कहता है मरहबा

ऐ शौक़-ए-फ़रीदी ! हम मीलाद के दीवानेमीलाद मनाते हैं, मीलाद मनाएँगे

पंद्रह सौ साला जश्न है रब के हबीब काहर बच्चा मेरे शहर का कहता है मरहबा

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-नबी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !महफ़िल-ए-ज़िक्र-ए-ना'त-ए-नबी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !शाद हुआ हर इक सुन्नी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !दिल की धड़कन झूम उठी ! ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद !

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