नात लिरिक्स

Noor Ki Anjuman Fatima

नूर की अंजुमन फ़ातिमा

नात ख़्वान: क़ारी रिज़वान ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नूर की अंजुमन फ़ातिमा !मर्कज़-ए-पंजतन फ़ातिमा !

'अर्श से बन के आई है तूमुर्तज़ा की दुल्हन, फ़ातिमा !

कहकशाँ से ज़ियादा हसींतेरे घर का चमन, फ़ातिमा !

तेरी ममता के हैं दो नयनइक हुसैन इक हसन, फ़ातिमा !

ख़ुल्द का 'अर्श पर है दिमाग़छू के तेरे चरन, फ़ातिमा !

कब किसी माँ ने पैदा किएफिर हुसैन-ओ-हसन, फ़ातिमा !

तेरे शौहर के दर से मिलाहम को रिज़्क़-ए-सुख़न, फ़ातिमा !

ग़ैर ने जिस को देखा नहींतेरा वो पैरहन, फ़ातिमा !

बोली ज़ैनब से रूह-ए-'अलीसर उठा और बन फ़ातिमा

तेरी चादर का रिज़वान कोहो मुयस्सर कफ़न, फ़ातिमा !

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