नात लिरिक्स

Nazdeek Aa Raha Hai Ramzan Ka Mahina

नज़दीक आ रहा है रमज़ान का महीना

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नज़दीक आ रहा है रमज़ान का महीनासाहिल से हाजियों का फिर आ लगा सफ़ीना

आक़ा ! न टूट जाए ये दिल का आबगीनाबुलवाइए मदीने, दिखलाइए मदीना

दिल रो रहे हैं जिन के आँसू छलक रहे हैंउन 'आशिक़ों का सदक़ा, बुलवाइए मदीना

हिज्र-ओ-फ़िराक़ में दिल बेताब हो रहे हैं'उश्शाक़ रो रहे हैं, लो चल दिया सफ़ीना

बेताब हो रहा है तयबा की हाज़री को'आशिक़ तड़प रहा है और फट रहा है सीना

रौज़े को देखने को आँखें तरस रही हैंदिखला दो सब्ज़-गुंबद, या सय्यिद-ए-मदीना

नज़र-ए-करम ख़ुदा-रा मेरे सियाह दिल परबन जाएगा ये दम भर में बे-बहा नगीना

रंगीनी-ए-जहाँ से दिल टूट जाए मेराया रब ! मुझे बना दे तू 'आशिक़-ए-मदीना

आँसू न थम रहे हों, दिल ख़ून उगल रहा होजिस वक़्त तेरे दर पर आऊँ, शह-ए-मदीना !

बस आरज़ू यही है क़दमों में जान निकलेप्यारे नबी ! हमारा मदफ़न बने मदीना

ऐ बेकसों के हमदम ! दुनिया के दूर हों ग़मबस जाए दिल में का'बा, सीना बने मदीना

तब्लीग़ सुन्नतों की करता रहूँ हमेशामरना भी सुन्नतों में हो सुन्नतों में जीना

आक़ा ! मेरी हुज़ूरी की आरज़ू हो पूरीहो जाए दूर दूरी, ऐ वाली-ए-मदीना !

उन के दियार में तू कैसे चले फिरेगा ?'अत्तार ! तेरी जुरअत, तू जाएगा मदीना !

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