नात लिरिक्स

Nabi Ke Ishq Mein Dhal Kar Nabi Ki Naat Padhte Hain

नबी के इश्क़ में ढल कर नबी की नात पढ़ते हैं

नात ख़्वान: असद इक़बाल कलकत्तवीशायर: असद इक़बाल कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नबी के 'इश्क़ में ढल कर नबी की ना'त पढ़ते हैंजो 'आशिक़ हैं वही अक्सर नबी की ना'त पढ़ते हैं

नज़र अपनी जमा कर गुंबद-ए-ख़ज़रा की रंगत परमदीन-ए-पाक के मंज़र नबी की ना'त पढ़ते हैं

ज़रा अंदाज़ तो देखे कोई ज़हरा के बेटे काकटा के रन में अपना सर नबी की ना'त पढ़ते हैं

है आग़ोश-ए-पिदर, मुस्कान लब पर, तीर ज़ालिम काअजब माहौल में असग़र नबी की ना'त पढ़ते हैं

इमाम अहमद रज़ा का 'इश्क़ भी कितना निराला हैउठा कर बहर से लंगर नबी की ना'त पढ़ते हैं

ठिकाने उन के दुश्मन को लगाते हैं रज़ा वालेबदल के अपना जब तेवर नबी की ना'त पढ़ते हैं

कमाल इस में असद का कुछ नहीं, है ना'त की बरकतजो बरसों से सर-ए-मिम्बर नबी की ना'त पढ़ते हैं

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