नात लिरिक्स

Chaman Chaman Ki DilKashi | Nabi Nabi Nabi Nabi

चमन चमन की दिलकशी | नबी नबी नबी नबी

नात ख़्वान: असद इक़बाल कलकत्तवीशायर: असद इक़बाल कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

चमन चमन की दिल-कशी, गुलों की है वो ताज़गीहै चाँद जिन से शबनमी, वो कहकशाँ की रौशनीफ़ज़ाओं की वो रागनी, हवाओं की वो नग़्मगीहै कितना प्यारा नाम भी, नबी नबी नबी नबी

ये आमद-ए-बहार है, वो नूर की क़तार हैफ़ज़ा भी ख़ुशगवार है, हवा भी मुश्कबार हैहवा से मैंने जब कहा, ये कौन आ गया बताहवा पुकारती चली, नबी नबी नबी नबी

ज़मीं बनी ज़माँ बने, मकीं बने मकाँ बनेचुनी बने चुना बने, वो वज्ह-ए-कुन-फ़काँ बनेकहा जो मैंने, ए ख़ुदा ! ये किस के सदक़े में बना ?तो रब ने भी कहा यही, नबी नबी नबी नबी

जो सिदरा पर नबी गए, तो जिब्रईल बोले येज़रा गया उधर परे, तो जल पढ़ेंगे पर मेरेनबी ही आगे चल पड़े, वो सिदरा से निकल पड़ेज़मीं पुकारती रही, नबी नबी नबी नबी

वो हुस्न-ए-ला-ज़वाल है, वो 'इश्क़ बे-मिसाल हैजो चर्ख़ का हिलाल है, नबी का वो बिलाल हैबदन सुलगती रेत पर, कि थरथरा उठे हजरज़बाँ पे था मगर यही, नबी नबी नबी नबी

चले जो क़त्ल को 'उमर, कहा किसी ने रोक करकहाँ चले हो और किधर, मिज़ाज क्यूँ है 'अर्श परज़रा बहन की लो ख़बर, फ़िदा है वो रसूल परवो कह रही है हर घड़ी, नबी नबी नबी नबी

'उमर चले बहन के घर, ग़ज़ब में सोच सोच करउड़ाएँगे हम उन का सर, जो हैं नबी के दीन परसुना है जब क़ुरआन को, ख़ुदा के उस बयान को'उमर ने भी कहा यही, नबी नबी नबी नबी

वो हिजरत-ए-रसूल है, फ़ज़ा-ए-दिल-मलूल हैक़दम क़दम बबूल है, क़ज़ा की ज़द में फूल है'अली की एक ज़ात है, कि तेग़ पर हयात है'अली के दिल में बस यही, नबी नबी नबी नबी

वो 'इश्क़ का हुसूल है, वो सुन्नियत का फूल हैवो ऐसा बा-उसूल है कि 'आशिक़-ए-रसूल हैरज़ा से मैंने जब कहा, ये शान किस की है 'अता ?रज़ा ने दी सदा यही, नबी नबी नबी नबी

रज़ा का ये पयाम है, वज़ीफ़ा-ए-तमाम हैवही तो नेक नाम है, नबी का जो ग़ुलाम हैजो 'आशिक़-ए-नबी हुवा, ख़ुदा का वो वली हुवावही हुवा है जन्नती, नबी नबी नबी नबी

मदीने की ज़मीं रहे, वो रौज़ा-ए-हसीं रहेमज़ार-ए-शाह-ए-दीं रहे, ग़ुलाम की जबीं रहेतो रूह निकले झूम के, दर-ए-नबी को चूम केयही पुकारती हुई, नबी नबी नबी नबी

वो जब समाँ हो हश्र का, हर एक शख़्स जा-ब-जाअज़ाब में हो मुब्तला, कि यक-ब-यक उठे सदासरापा नूर आ गए, मेरे हुज़ूर आ गएतो कह उठे ये उम्मती, नबी नबी नबी नबी

थकी थकी रुकी रुकी, किसी तरह दबी-लचीहलीमा-बी की ऊँटनी, जो मक्के में पहुँच गईथे सारे बच्चे जा चुके, जगह वो अपनी पा चुकेबचा था एक आख़री, नबी नबी नबी नबी

वो रूह के तबीब से, असद ! कभी नसीब सेख़ुदा के उस हबीब से, मिलोगे जब क़रीब सेनबी की एक ज़ात है, जो मंब'-ए-हयात हैमिलेगी दाइमी ख़ुशी, नबी नबी नबी नबी

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