नात लिरिक्स

Fida Kar Ishq-e-Nabi Par Jaan | Zamana Yaad Karega

फ़िदा कर इश्क़-ए-नबी पर जान | ज़माना याद करेगा

नात ख़्वान: असद इक़बाल कलकत्तवीशायर: असद इक़बाल कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़िदा कर 'इश्क़-ए-नबी पर जानमुकम्मल कर ले तू ईमानज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा

दिन-रात तड़प ये रहती है, ऐ काश ! मदीना जाऊँ मैंअल्ताफ़-ओ-करम की वादी से ता-'उम्र न वापस आऊँ मैंमेरे दिल का है यही अरमाननिछावर कर दूँ उन पर जानज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा

जब याद नबी की आती है, इक कैफ़ का 'आलम होता हैजब ज़िक्र-ए-नबी छिड़ जाता है, इक वज्द का मौसम होता हैयही तो कहता है क़ुरआनकि आक़ा हैं जान-ए-ईमानज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा

सरकार से तू है दूर मगर, सरकार तो तुझ से दूर नहींक्यूँ खोया खोया रहता है, मुख़्तार है तू मजबूर नहींनबी को पहले दिल से माननबी पे सब कुछ कर क़ुर्बानज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा

अस्लाफ़ की है तारीख़ यही, साहिल पे जला दी है कश्तीदौड़ाए हैं घोड़े दरिया पर, क्या 'इश्क़-ए-नबी की मस्ती थीतुम्ही हो वो मर्द-ए-मैदानज़रा ढूँडो अपनी पहचानज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा

जो बात थी आ'ला हज़रत में, वो आज किसी हज़रत में नहींवो 'इश्क़-ए-नबी का पैकर थे, थर्राते थे उन से दुश्मन भीदिया हम को कंज़ुल-ईमानये है हम पर उन का एहसानज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा

दरबार-ए-विलायत क्या कहना, जब उन का इशारा मिलता हैबरसों की डूबी कश्ती को इक पल में किनारा मिलता हैअसद ! ये ग़ौस का है फ़ैज़ानहै जिस से नज्दी भी हैरानज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा

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