नात लिरिक्स

Arab Se Sham Tak Jo Raushni Hai | Mere Sarkar Ki Aamad Hui Hai

अरब से शाम तक जो रौशनी है | मेरे सरकार की आमद हुई है

नात ख़्वान: असद इक़बाल कलकत्तवीशायर: असद इक़बाल कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अरब से शाम तक जो रौशनी हैमेरे सरकार की आमद हुई है

हलीमा बी चलीं आक़ा को ले करअजब तेजी में उन की ऊँटनी है

महल भी झुक के देते हैं सलामीहलीमा बी की ऐसी झोंपड़ी है

बशर की बात क्या ! दुनिया की हर शयनबी की ना'त सुन कर झूमती है

नबी की ना'त के आगे ग़ज़ल भीअदब से हाथ को बाँधे खड़ी है

मगस फूलों के रस को मुँह में रख करदुरूद-ए-पाक उन पर पढ़ रही है

लगा मुँह में घुला है शहद-ए-नायाबवो ज़िक्र-ए-मुस्तफ़ा की चाशनी है

कोई कह दे कि चल शहर-ए-नबी कोमदीने से इजाज़त मिल गई है

हैं सिद्दीक़-ओ-'उमर पहलू में उन केनबी से कितनी गहरी दोस्ती है

मुनाफ़िक़ तो मुनाफ़िक़ है, ज़मीं भी'उमर का नाम सुन कर काँपती है

तेरे दर की गदाई, मेरे आक़ा !जहाँ की बादशाही से भली है

नबी के ज़िक्र की ये बरकतें हैंमेरी साँसों में ख़ुश्बू सी बसी है

नबी से 'इश्क़ तो सब को है लेकिनजुदा सब से बिलाली 'आशिक़ी है

है जिस के दिल में ग़म इब्न-ए-'अली काज़माने में वही सब से धनी है

हम इस निस्बत पे क़ुर्बां क्यूँ न जाएँ ?हमारा ग़ौस-ए-आ'ज़म फ़ातिमी है

फ़ना के बा'द हम ज़िंदा रहेंगेहमारे दिल में साबिर कलियरी है

जिसे सब मो'जिज़ा आक़ा का बोलेंवही अहमद रज़ा ख़ाँ क़ादरी है

सुनो तो बस्ती-बस्ती क़र्या-क़र्यायही आवाज़ हर-सू गूँजती है

जहान-ए-सुन्नियत के दिल की धड़कनमेरा अख़्तर रज़ा ख़ाँ अज़हरी है

निछावर जिस पे हैं शाहान-ए-दुनियावो सुरकाही का इक तेग़-ए-'अली है

जिसे किल्क-ए-रज़ा कहती है दुनियासमझ लो वो 'असा-ए-मूसवी है

मेरे मख़्दूम फिर दूल्हा बने हैंनिराली शान की शादी रची है

दर-ए-मख़्दूम पे तुम आ के देखोहवा शहर-ए-नबी से आ रही है

मेरे आक़ा ! दिखा दो अपना जल्वाअसद की आँख कब से हसरती है

असद ! ये फ़ैज़ है अख़्तर का वर्नाये दुनिया कब किसी को पूछती है

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