नात लिरिक्स

Nabi-e-Mukarram Rasool-e-Muazzam | Khudara Ziyarat Kara Dijiye Na

नबी-ए-मुकर्रम रसूल-ए-मुअज़्ज़म | ख़ुदा-रा ज़ियारत करा दीजिए ना

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरीशायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नबी-ए-मुकर्रम, रसूल-ए-मु'अज़्ज़म !मेरी सोई क़िस्मत जगा दीजिए नाज़ियारत की ख़ातिर हैं बेचैन आँखेंख़ुदा-रा ज़ियारत करा दीजिए ना

पहुँचते ही हर शाम सहबा में सूरजयही कहता होगा तसव्वुर में उन सेबुलाया था जिस के इशारे से मुझ कोवही ऊँगली फिर से उठा दीजिए ना

ऐ जान-ए-मसीहा ! ग़ुलामों के दिल कोगुनाहों की बीमारियाँ लग गई हैंहुज़ूर ! अपने बीमार 'आबिद के सदक़ेज़रा दस्त-ए-शफ़क़त बड़ा दीजिए ना

गुनहगार हूँ मैं, ख़ता-कार हूँ मैंमगर ये तमन्ना है, ऐ मेरे आक़ा !कि मैं आप के नाम पर जान दूँगामुझे जज़्बा-ए-हन्ज़ला दीजिए ना

रहे प्यार यूँ ही सदा पंजतन सेन असहाब निकलें किसी के भी मन सेग़ुलाम आप के सब हैं दामन पसारेइन्हें सदक़ा-ए-कर्बला दीजिए ना

बरेली के ताजुश्शरी'आ के सदक़ेवसी का गुलाब-ए-तमन्ना भी महकेकिसी रोज़, सरकार ! दर पर बुला करशफ़ा'अत का मुज़्दा सुना दीजिए ना

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