नात लिरिक्स

Na Kaleem Ka Tasawwur Na Khayal-e-Toor-e-Seena | Bolo Madina Madina Madina

न कलीम का तसव्वुर न ख़याल-ए-तूर-ए-सीना | बोलो मदीना मदीना मदीना

नात ख़्वान: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बोलो मदीना मदीना मदीनाबोलो मदीना मदीना मदीना

न कलीम का तसव्वुर, न ख़याल-ए-तूर-ए-सीनामेरी आरज़ू मुहम्मद, मेरी जुस्तुजू मदीना

मैं गदा-ए-मुस्तफ़ा हूँ, मेरी 'अज़मतें न पूछोमुझे देख कर जहन्नम को भी आ गया पसीना

मुझे, दुश्मनो ! न छेड़ो, मेरा है कोई जहाँ मेंमैं अभी पुकार लूँगा, नहीं दूर है मदीना

मैं मरीज़-ए-मुस्तफ़ा हूँ, मुझे छेड़ो न, तबीबो !मेरी ज़िंदगी जो चाहो, मुझे ले चलो मदीना

मेरे डूबने में बाक़ी न कोई कसर रही थीकहा अल-मदद मुहम्मद, तो उभर गया सफ़ीना

सिवा इस के मेरे दिल में कोई आरज़ू नहीं हैमुझे मौत भी जो आए तो हो सामने मदीना

नहीं माल-ओ-ज़र तो क्या है, मैं ग़रीब हूँ यही नामेरे 'इश्क़ मुझ को ले चल तू ही जानिब-ए-मदीना

कभी, ऐ शकील ! दिल से न मिटे ख़याल-ए-अहमदइसी आरज़ू में मरना, इसी आरज़ू में जीना

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