नात लिरिक्स

Aye Shahenshah-e-Madina Assalatu Wassalam

ऐ शहंशाह-ए-मदीना अस्सलातु वस्सलाम

नात ख़्वान: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दीशायर: मौलाना जमीलुर्रहमान रज़वी क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ शहंशाह-ए-मदीना ! अस्सलातु वस्सलामज़ीनत-ए-'अर्श-ए-मु'अल्ला ! अस्सलातु वस्सलाम

रब्बी हब ली उम्मती कहते हुए पैदा हुएहक़ ने फ़रमाया कि बख़्शा, अस्सलातु वस्सलाम

दस्त-बस्ता सब फ़रिश्ते पढ़ते हैं उन पर दुरूदक्यूँ न हो फिर विर्द अपना अस्सलातु वस्सलाम

मोमिनो ! पढ़ते नहीं क्यूँ अपने आक़ा पर दुरूदहै फ़रिश्तों का वज़ीफ़ा अस्सलातु वस्सलाम

मोमिनो ! पढ़ते रहो तुम अपने आक़ा पर दुरूदहै फ़रिश्तों का वज़ीफ़ा अस्सलातु वस्सलाम

बुत-शिकन आया ये कह कर, सर के बल बुत गिर गएझूम कर कहता था का'बा अस्सलातु वस्सलाम

सर झुका कर बा-अदब 'इश्क़-ए-रसूलुल्लाह मेंकह रहा था हर सितारा अस्सलातु वस्सलाम

ग़ुंचे चटके फूल महके चहचहाईं बुलबुलेंगुल खिला बाग़-ए-अहद का अस्सलातु वस्सलाम

मैं वो सुन्नी हूँ, जमील-ए-क़ादरी ! मरने के बा'दमेरा लाशा भी कहेगा अस्सलातु वस्सलाम

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