नात लिरिक्स

Main Behak Sakoon Ye Majal Kya | Mera Rehnuma Koi Aur Hai

मैं बहक सकूँ ये मजाल क्या मेरा रहनुमा कोई और है

नात ख़्वान: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं बहक सकूँ ये मजाल क्या, मेरा रहनुमा कोई और हैमुझे ख़ूब जान लें मंज़िलें, ये शिकस्ता-पा कोई और है

जो तुम्हारी जाली से मुत्तसिल, है सुतूँ के पीछे ख़जिल ख़जिलनहीं मैं नहीं वो मरीज़-ए-दिल, न मेरे सिवा कोई और है

मेरी इल्तिजा है ये, दोस्तो ! कभी तुम जो सू-ए-हरम चलोतो बना के सर को क़दम चलो, कि ये रास्ता कोई और है

है तुझे ख़बर, शह-ए-'ईन-ओ-आँ ! मेरी वजह-ए-राहत-ए-क़ल्ब-ओ-जाँन तेरे सिवा कोई और था, न तेरे सिवा कोई और है

ये गुमान था कई साल से, ये यक़ीन है कई रोज़ सेमेरे दिल से गुंबद-ए-सब्ज़ का, ये मु'आमला कोई और है

वो हबीब-ए-रब्ब-ए-करीम हैं, वो रऊफ़ हैं, वो रहीम हैंउन्हें फ़िक्र है मेरी आप की, उन्हें चाहता कोई और हैं

मैं जो दूर अर्ज़-ए-हरम से था, हुई ख़ुल्द-ए-गोश हसीं सदाहै इसी में माजिद-ए-बे-नवा, कि ये क़ाफ़िला कोई और है

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