नात लिरिक्स

Main Sajda Karun Ya Ki Dil Ko Sambhalun | Muhammad Ki Chaukhat Nazar Aa Rahi Hai

मैं सज्दा करूँ या कि दिल को सँभालूँ | मुहम्मद की चौखट नज़र आ रही है

नात ख़्वान: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दीशायर: मुहम्मद बख़्श मुस्लिमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं सज्दा करूँ या कि दिल को सँभालूँ, मुहम्मद की चौखट नज़र आ रही हैइसी बेख़ुदी में कहीं खो न जाऊँ, तड़प कमली वाले की तड़पा रही है

दो 'आलम का दाता मेरे सामने है, कि का'बे का का'बा मेरे सामने हैअदा क्यूँ न फ़र्ज़-ए-मोहब्बत करूँ मैं, ख़ुदा की ख़ुदाई झुकी जा रही है

फ़क़ीरी का मुझ में नहीं है सलीक़ा, न आता है कुछ माँगने का तरीक़ाइधर भी निगाह-ए-करम, कमली वाले ! ज़माने की झोली भरी जा रही है

ये फ़रमाया हक़ ने कि प्यारे मुहम्मद ! हमारे हो तुम हम तुम्हारे, मुहम्मद !हमें अपने जल्वों में, ऐ कमली वाले ! तुम्हारी ही सूरत नज़र आ रही है

ये जज़्ब-ए-मोहब्बत है रहमत ख़ुदा की, है चौखट मेरे सामने मुस्तफ़ा कीमुझे क्यूँ न हो नाज़ क़िस्मत पे, मुस्लिम ! मोहब्बत कहाँ से कहाँ ला रही है

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