नात लिरिक्स

Aai Phir Yaad Madine Ki Rulane Ke Liye

आई फिर याद मदीने की रुलाने के लिए

नात ख़्वान: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दीशायर: अदील सुल्तानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आई फिर याद मदीने की रुलाने के लिएदिल तड़प उट्ठा है दरबार में जाने के लिए

काश ! मैं उड़ता फिरूँ ख़ाक-ए-मदीना बन करऔर मचलता रहूँ सरकार को पाने के लिए

ग़म नहीं छोड़ दे ये सारा ज़माना भी मुझेमेरे आक़ा तो हैं सीने से लगाने के लिए

मेरे लजपाल ने रुस्वा न कभी होने दियाजब पुकारा उन्हें आए हैं बचाने के लिए

ये तो बस उन का करम है कि वो सुन लेते हैंवर्ना ये लब कहाँ फ़रियाद सुनाने के लिए

बख़्श दी ना'त की दौलत जो हमें आक़ा नेकितना प्यारा है वसीला उन्हें पाने के लिए

फिर मुयस्सर तुझे दीदार-ए-मदीना होगावो बुलाएँगे तुझे जल्वा दिखाने के लिए

मुझ गुनहगार-ओ-ख़ताकार को महशर में, 'अदील !होंगे मौजूद वो दामन में छुपाने के लिए

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